यादों की गिरवी दुकान

मनहुआड्रामारहस्य

यादों की गिरवी दुकान

चौबीस साल की आ ची को लगा था कि दादाजी के गुजरने के बाद उसे कर्ज और धूल भरी पुरानी चीजें मिलेंगी, कोई अलौकिक बहीखाता नहीं। पुरानी शहर की गली में स्थित यह छोटी सी दुकान असल में अमूर्त मानवीय अनुभवों—दुख, बचपन के प्यारे पलों और चुराई गई किस्मत का व्यापार करती है। अपने दादाजी के पीतल के तराजू के सहारे, आ ची को अपने अनोखे ग्राहकों के जज्बातों का मोल लगाना होता है। लेकिन इस संतुलन की भारी कीमत है। हर लेन-देन में गिरवी रखने वाले को अपनी ही यादों का एक हिस्सा दांव पर लगाना पड़ता है। अब उसे अपनी खोती पहचान को बचाते हुए शहर के रहस्यों को सुलझाना होगा, इससे पहले कि वह खुद को ही भूल जाए।

अध्याय
1
मुफ्त
1

Yomu पर पढ़ें

अध्याय

  1. 1 सोने का वजन मुफ्त

मिलते-जुलते टाइटल

पढ़ना शुरू करें।

मुफ़्त डाउनलोड। खाते की ज़रूरत नहीं।